Tuesday, 13 March 2018

बातें

बस कहने को है ये दुनिया भर की बातें....

वो चंद किस्से, वो चंद मुलाकातें,
फिर न जाने......
तुम कहां और हम कहां थे,
अब दामन में आए....
ये छोटे से दिन, वो लम्बी सी रातें....

बस कहने को है ये दुनिया भर की बातें....

कुछ यादों के पल मिले थे जिन्दगी के,
वो दो चार पल......
जब बहके थे हम दिल्लगी से,
जीवंत पल वो खुशी के.....
अब गूंजते है जेहन में वो ही बातें.....

बस कहने को है ये दुनिया भर की बातें....

वो ही चंद किस्से, वो ही चंद बातें,
फिर वही मुलाकातें....
वो ही संग जीवंत धड़कनों का,
वो बहकी सी जज्बातें....
काश! फिर वही पल मुझे मिल पाते.....

बस कहने को है ये दुनिया भर की बातें....

"जीवन कलश" जीवन के कुछ लम्हे

कोरा अनुबंध

कैसी ये संविदा? कैसा यह कोरा अनुबंध? अनुबंधों से परे ये कैसा है बंधन! हर पल इक बंधन में रहता है ये मन! किन धागों से है बंधा ये बंधन! ...

विगत 30 दिनों में ज्यादा लोकप्रिय रचनाएँ