कर कुछ बात, ऐ उमस भरी काली रात,
उकेर जरा, ये काली चादर,
मुंह फेर इधर, देख तमस के बाहर,
जागी कितनी ये रात!
बातों में, कुछ ताने ही दे,
उमस भरे, सारे अफसाने कह दे,
पिघल पड़े जज्बात!
कर कुछ बात, ऐ उमस भरी काली रात,
नींद नहीं, तो सपने ही दे,
धड़कन को, सपनों में हंसने तो दे,
रुकी-रुकी हर बात!
कर कुछ बात, ऐ उमस भरी काली रात,
बिन बातों के, जीवन कैसा,
जीवंत एहसासों बिन,आंगन कैसा,
जगाए, ऐसी ही बात!
कर कुछ बात, ऐ उमस भरी काली रात।
