कविता "जीवन कलश"

जीवन के अनुभवों पर, मेरे मन के उद्घोषित शब्दों की अभिव्यक्ति है - कविता "जीवन कलश"। यूं, जीवन की राहों में, हर पल छूटता जाता है, इक-इक लम्हा। वो फिर न मिलते हैं, कहीं दोबारा ! कभी वो ही, अपना बनाकर, विस्मित कर जाते हैं! चुनता रहता हूँ मैं, उन लम्हों को और संजो रखता हूँ यहाँ! वही लम्हा, फिर कभी सुकून संग जीने को मन करता है, तो ये, अलग ही रंग भर देती हैं, जीवन में। "वैसे, हाथों से बिखरे पल, वापस कब आते हैं! " आइए, महसूस कीजिए, आपकी ही जीवन से जुड़े, कुछ गुजरे हुए पहलुओं को। (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Monday, 20 October 2025

रौशनी

›
अंधेरी हैं गलियां, इक दीप तो जलाओ, यूं गगन पर, टिमटिमाते ओ सितारे,  जरा, रौशनी ले आओ! प्रदीप्त हो जलो, बस यूं न टिमटिमाओ, अवरोध ढ़ले, किरण च...
7 comments:
Sunday, 19 October 2025

राह दिखाए रब

›
आश लिए कितने, गिनता अपनी ही आहें, घिरा किन विरोधाभासों में, जाने मन क्या चाहे, कभी उमड़ते, जज्बातों के बादल, कभी, सूना सा आंचल! बंधकर, कितनी...
Wednesday, 1 October 2025

अनुरूप

›
मन चाहे, अनुरूप तेरे ढ़ल जाऊं,  और, गीत वही दोहराऊं! इक मैं ही हूं, जब तेरी हर आशाओं में, मूरत मेरी ही सजती, जब, तेरे मन की गांवों में, भिन्न...
5 comments:
Thursday, 25 September 2025

व्यतीत

›
अतीत बन, ढ़ला जाता हूं.... व्यतीत, हुआ जाता हूं, पल-पल, अतीत, हुआ जाता हूं, फलक पर, उगता था, तारों सा रातों में, कल तक था, सबकी आंखों में, अब...
6 comments:
Sunday, 21 September 2025

अचानक

›
न रोकिए, अचानक ही होने दीजिए! धुआं, खुद ही छट जाएगा, हट जायेगा, धुंध,  रख कर, खुद को अलग, इस आग को, होने दीजिए, स्वतः सुलग, फूटेगी इक रोशनी,...
Monday, 8 September 2025

चुप जो हुए तुम

›
चुप जो हो गए, तुम... खो गए रास्ते, शब्द वो अनकहे हो गए गुम! रही अधूरी ही, बातें कई, पलकें खुली, गुजरी न रातें कई, मन ही रही, मन की कही, बुनक...
5 comments:
Saturday, 6 September 2025

शुक्रिया पाठकगण - 500000 + Pageview

›
500000 (+) पेज व्यू - शुक्रिया पाठकगण माननीय पाठकगण, अब तक 500000 (पांच लाख) से अधिक PAGEVIEW देकर सतत लेखन हेतु प्रेरित करने के लिए  कविता ...
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
Chennai, Tamilnadu, India
मैं, एक आम व्यक्ति, बिल्कुल आप जैसा ही। बस लगाव है भावनाओं से, एक जुड़ाव है संवेदनाओं से। महसूस करता हूँ, तो कलम चल पड़ती है और जन्म लेती है, एक नई रचना। मेरी नवीनतम रचनाओं की जानकारी हेतु, आप इस ब्लॉग को फॉलो करें। इसकी सूचना आप मेरे WhatsApp / Contact No. 9507846018 के STATUS पर भी पा सकते हैं।
View my complete profile
Powered by Blogger.