कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?
यूं, लफ़्ज़ों का हिलना, शब्दों का बहना,
यूं, अश्क छलकना,व्यर्थ रहा,
इतना कुछ कहकर भी, बाकि था, कितना कुछ कहना!
कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?
यूं महसूस हुआ, सदियों की कोई वर्जना,
उस ठहरे से, बादल की गर्जना,
आ टकराई हो, मुझसे,
और, अनभिज्ञ रहा मैं कितना!
कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?
मै हतप्रभ, सुनता रहा शब्दों का झुनझुना,
व्यथा गढ़े, शब्दोऺऺऺ की अभिव्यऺजना,
ना-समझी की, हद थी,
रहा शेष, कितना कुछ सुनना!
कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 09 अगस्त 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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सुंदर
ReplyDeleteमन का पार पाना बहुत कठिन है, अपार है इसकी गहराई, इसे तो मन के पार जाकर ही समझा जा सकता है
ReplyDeleteवाह बहुत सुन्दर
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