कविता "जीवन कलश"

जीवन के अनुभवों पर, मेरे मन के उद्घोषित शब्दों की अभिव्यक्ति है - कविता "जीवन कलश"। यूं, जीवन की राहों में, हर पल छूटता जाता है, इक-इक लम्हा। वो फिर न मिलते हैं, कहीं दोबारा ! कभी वो ही, अपना बनाकर, विस्मित कर जाते हैं! चुनता रहता हूँ मैं, उन लम्हों को और संजो रखता हूँ यहाँ! वही लम्हा, फिर कभी सुकून संग जीने को मन करता है, तो ये, अलग ही रंग भर देती हैं, जीवन में। "वैसे, हाथों से बिखरे पल, वापस कब आते हैं! " आइए, महसूस कीजिए, आपकी ही जीवन से जुड़े, कुछ गुजरे हुए पहलुओं को। (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Showing posts with label नमन. Show all posts
Showing posts with label नमन. Show all posts
Sunday, 14 December 2025

पूर्वज

›
वो, आसमां पे रब हुए..... करुण स्वर, जिनके, कर जाते थे सहज, पूर्वज मेरे, जिनके, हम हैं वंशज, वो, आसमां पे रब हुए, दूर कब हुए! वो, आसमां पे रब...
6 comments:
Sunday, 27 May 2018

प्रार्थना

›
श्रद्धा सुमन, है तुझको अर्पण, नमन है मेरा, हे भगवन! है तुझको नमन! स्वीकार लो ये मेरी प्रार्थना, निष्काम निष्कपट मेरी साधना, भूल कोई...
Sunday, 10 January 2016

सूर्य नमन

›
नमन आलिंगन नव प्रभात,  हे रश्मि किरण तुम्हारा, खुद अग्नि मे हो भस्म, तम हरती करती उजियारा। जनकल्यान परोपकार हेतु पल-पल भस्म तू ...
›
Home
View web version

About Me

My photo
पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
Chennai, Tamilnadu, India
मैं, एक आम व्यक्ति, बिल्कुल आप जैसा ही। बस लगाव है भावनाओं से, एक जुड़ाव है संवेदनाओं से। महसूस करता हूँ, तो कलम चल पड़ती है और जन्म लेती है, एक नई रचना। मेरी नवीनतम रचनाओं की जानकारी हेतु, आप इस ब्लॉग को फॉलो करें। इसकी सूचना आप मेरे WhatsApp / Contact No. 9507846018 के STATUS पर भी पा सकते हैं।
View my complete profile
Powered by Blogger.