Tuesday, 15 May 2018

नए नग्मे

नग्में नए गुनगुनाओ, मेरी पनाहो में आओ....

तुम हर पल यूं ही मुस्कुराओ,
तराने नए तुम बनाओ,
नए जिन्दगी की नई ताल पर,
झूमो यूं, मस्ती में आओ....

नग्में नए गुनगुनाओ, मेरी पनाहो में आओ....

तुम बहारों के दामन में खेलो,
कलियो सी खिलखिलाओ,
चटक रंग की नई फूल सी तुम,
आंगन को मेरे सजाओ....

नग्में नए गुनगुनाओ, मेरी पनाहो में आओ....

तुम वापस न जाने को आओ,
लौटकर फिर न जाओ,
कह दो जरा, के मेरे हो तुम,
सपनों को मेरे सजाओ....

नग्में नए गुनगुनाओ, मेरी पनाहो में आओ....

No comments:

Post a Comment

"जीवन कलश" जीवन के कुछ लम्हे

आवश्यक अनुरोध (सूचना)

ब्लाॅग के पाठकों से अनुरोध.. शायद आपको मालूम हो कि अब G+ खत्म होने वाला है। अतः G+ Platform से किए गए सारे comments स्वतः ही समाप्त ह...

विगत 30 दिनों में ज्यादा लोकप्रिय रचनाएँ