Saturday, 8 August 2026

मैं अनभिज्ञ


कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?

यूं, लफ़्ज़ों का हिलना, शब्दों का बहना,
यूं, अश्क छलकना,व्यर्थ रहा, 
इतना कुछ कहकर भी, 
बाकि था, कितना कुछ कहना!

कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?

यूं महसूस हुआ, सदियों की कोई वर्जना,
उस ठहरे से, बादल की गर्जना, 
आ टकराई हो, मुझसे,
और, अनभिज्ञ रहा मैं कितना!

कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?

मै हतप्रभ, सुनता रहा शब्दों का झुनझुना,
व्यथा गढ़े, ‌‌शब्दोऺऺऺ की अभिव्यऺजना,
ना-समझी की, हद थी,
रहा शेष, कितना कुछ सुनना!

कैसे पढ़ लूं, मन की व्यक्त-अव्यक्त रचना?