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Friday, 27 March 2026

आप, या कल्पना!

एक ख्वाहिश जगी रहती है..... 

कहीं, हों ना आप!
हर तरफ, यूँ देखूं, चुपचाप,
उन तन्हाइयों से, इक रंजिश बनी रहती है,
वो कशिश, बनी रहती है!

एक ख्वाहिश जगी रहती है..... 

जो आप, ना आएं!
एक ख्वाहिश, जगती जाए,
उसी एक पल की, फरमाइश बनी रहती है,
गुजारिश, बनी रहती है!

एक ख्वाहिश जगी रहती है..... 

जो आप, हों चुप!
चुप से लगते हैं, ये पल सारे,
शब्दों से, तरन्नुम की ख्वाहिश बनी रहती है,
फरमाइश, बनी रहती है!

एक ख्वाहिश जगी रहती है..... 

न देखें, आप गर!
बढ़े, ये हसरतें, सर-बसर,
नजर में ढालने की कोशिश बनी रहती है,
गुंजाइश, बनी रहती है!

एक ख्वाहिश जगी रहती है..... 

आप, या कल्पना!
ख्वाबों में लिपटी अल्पना,
हकीकत, बनाने की कोशिश बनी रहती है,
गुजारिश, बनी रहती है!

एक ख्वाहिश जगी रहती है..... 

ये मन ही, बेसबर, 
ले हरपल, उनकी ही खबर,
लगन, हर पहर, पुर-कशिश बनी रहती है,
फरमाइश, बनी रहती है!

एक ख्वाहिश जगी रहती है..... 

Friday, 11 January 2019

गुजारिश

ऐ बेजार हवाओं!
है बस एक गुजारिश!
तुम गीत न ऐसे, फिर मुझको सुनाओ!

सदियाँ सूखीं, युग-युगांतर सूख गए,
नदियाँ सूखीं, झील, ताल-तलैया सूख गए,
मौसम बदले, हवाओं के रुख मोड़ गए,
सूखे पत्ते, अगणित राहों में छोड़ गए......

ऐ बेजार हवाओं!
है बस एक गुजारिश!
बरस भी जाओ, सदा न ऐसे भरमाओ!

भूल चले सब, अब रिमझिम के धुन,
गूंज रहे कानों में, खड़-खड़ पत्तों के धुन,
पनघट बाजे ना, पायल की रून-झुन,
छेड़ जरा तू, फिर से बारिश की धुन.....

ऐ बेजार हवाओं!
है बस एक गुजारिश!
गाओ, गीत कोई मतवाला फिर से गाओ!

सूखे हैं तट, मांझी की सूनी है नैय्या,
सूनी नजरों से, टुक-टुक ताके है खेवैय्या,
गीत न कोई गाए, गुमसुम सा गवैय्या,
बोल, बेरहम सा क्यूँ तेरा है रवैय्या......

ऐ बेजार हवाओं!
है बस एक गुजारिश!
रूठो ना तुम, राग सुरीला फिर सेे गाओ!

सूखे से मौसम में, भीगी हैं ये आँखें,
बेमौसम, बरस जाती है जब-तब ये आँखें,
हृदय तक, जल-प्लावित हैं सारी राहें,
तुम भीग लो, ले लो इनकी ही आहें...

ऐ बेजार हवाओं!
है बस एक गुजारिश!
रूखे गीत ऐसे, फिर से तुम ना गाओ!