Showing posts with label अनियंत्रित. Show all posts
Showing posts with label अनियंत्रित. Show all posts

Sunday, 15 February 2026

खोता सुध

सुध, खोता जाता हूँ....

हैरान कर देते हो, इस बुत को,
यूँ, पल पल, बुनते हो, मुझमें खुद को,
उलझता सा, जाता हूँ,
शर्माता हूँ,
फिर, खुद पर इतराता हूँ!

सुध, खोता जाता हूँ....

समझ सकूं ना, कैसी ये भाषा!
चंचल उन नैनों की, सांकेतिक परिभाषा,
इंगित, क्या अभिलाषा!
कैसी आशा!
जागृत, खुद में पाता हूँ!

सुध, खोता जाता हूँ....

फुर्र हो चले, सुधि के वो क्षण,
हो चले अनियंत्रित, हृदय के ये धड़कन,
अंतः, गहराता इक सावन,
लहराता घन,
बरसता, खुद को पाता हूँ!

सुध, खोता जाता हूँ....

इक बुत ही था, अब जिंदा हूँ,
अंजाने, धड़कन और साँसों में बंधा हूँ,
लिपटा, उनकी ही धागों में,
एहसासों में,
सिमटा, खुद को पाता हूँ!

सुध, खोता जाता हूँ....