Showing posts with label सस्पृह. Show all posts
Showing posts with label सस्पृह. Show all posts

Sunday, 1 March 2026

निःसंग

मन निःसंग, दौड़े, दिशाहीन किस ओर,
कोई ठौर कहां, उस छोड़!

आ, दो पल, बैठ जरा संग मेरे,
कह दे, अंतः क्या तेरे,
कर, दो बात,
मैं अज्ञानी, इक निस्पृह प्राणी,
तू, सस्पृह रातों की रानी,
ये, स्याह रात,
भटका ले जाए ना, कहीं और!

मन निःसंग, दौड़े, दिशाहीन किस ओर,
कोई ठौर कहां, उस छोड़!

फैले, इच्छाओं के, विस्तृत वन,
घेरे, मायाजाल सघन,
वियावान रन,
इक्षाओं लिप्साओं में, तू लिप्त,
हो कहां, अभिलाषा तृप्त,
अधूरी ये बात,
बहला ले जाए ना, कहीं और!

मन निःसंग, दौड़े, दिशाहीन किस ओर,
कोई ठौर कहां, उस छोड़!

वो, अंतहीन, मायावी विस्तार,
लघु, ये मेरा संसार,
कितना बेजार,
करता हर क्षण, तेरा इंतजार,
यूँ भाए ना, एकाकीपन,
बेगानी ये बात,
फुसला ले जाए ना, कहीं और!

मन निःसंग, दौड़े, दिशाहीन किस ओर,
कोई ठौर कहां, उस छोड़!