Thursday, 15 January 2026

सुष्मिता

उनको ही, सुनता रहा,
उन वादियों में बैठा, मैं शून्य ही बुनता रहा....

पलकें जम सी गईं, वक्त थम सी गईं,
अपलक, निहारता,
मैं, कोमल सी, उनकी सुष्मिता,
खूबसूरत, हर अदा,
अबोले, हर शब्द उनके, मैं चुनता ही रहा!

उनको ही, सुनता रहा,
उन वादियों में बैठा, मैं शून्य ही बुनता रहा....

मैं खोया कहीं, इक पवन छू कर गई,
कुछ कह कर गई,
उन डालियों पर, झूलती लता,
पंछियों की, सदा,
अनबुझ से वो इशारे, मैं देखता ही रहा!

उनको ही, सुनता रहा,
उन वादियों में बैठा, मैं शून्य ही बुनता रहा....

समझ से परे, उनकी कंपित धड़कनें,
कैसे हर पल गिनें, 
टेढ़े, पगडंडियों सा वो रास्ता,
है कैसा, वास्ता?
अनगिन उलझनें, मैं सुलझाता ही रहा!

उनको ही, सुनता रहा,
उन वादियों में बैठा, मैं शून्य ही बुनता रहा....

वो कुनकुनी सी धूप, दुल्हन सी रूप,
मोहक, हर स्वरूप,
मुख पे फैली, इक सुष्मिता,
रोकती थी रास्ता,
विलग इक राह पर, मैं चलता ही रहा!

उनको ही, सुनता रहा,
उन वादियों में बैठा, मैं शून्य ही बुनता रहा....

संग, अपने ही कहीं, मैं खुद भी नहीं,
यूं, खोया मैं कहीं!
तोड़ कर, इस जग से वास्ता,
छोड़ कर, रास्ता,
खुद अपना ही पता, मैं ढूंढता ही रहा!

उनको ही, सुनता रहा,
उन वादियों में बैठा, मैं शून्य ही बुनता रहा....

Saturday, 10 January 2026

ख्वाहिशों के पर

ख्वाहिशों के, तो, पर होते है!
मगर, वही अक्सर, राह में, रहगुजर, होते हैं।

जिंदा हो, तो ख्वाहिशें भी हैं,
इन सांसों के संग, चंद रंजिशें भी हैं,
जिद, और, कोशिशें भी है,
बिन कहां इनके, मंजिलों के, सफर होते है!

ख्वाहिशों के, तो, पर होते है!

पा जाते अगर, उड़ भी जाते,
ख्वाहिशों को, और, नजदीक लाते,
अनथक, कोशिशें मिन्नतें,
मगर, हसरतें, ख्वाहिशों के, बेखबर होते हैं!

ख्वाहिशों के, तो, पर होते है!

हसरतें, गर, एक हो तो कहें,
अनगिनत, इन, ख्वाहिशों के मेले,
और, यहां, हम अकेले,
अड़े जिद पे ख्वाहिश, बड़े बेसबर होते हैं!

ख्वाहिशों के, तो, पर होते है!

चल रहा, कब से, ये कारवां,
दिन-ब-दिन, ये और हो रही जवां,
चाहे, चूम लूं आसमां,
संग उनके ही साए, राह के रहगुजर होते हैं!

ख्वाहिशों के, तो, पर होते है!
मगर, वही अक्सर, राह में, रहगुजर, होते हैं।

Sunday, 4 January 2026

फलक

हो नजरों में, पर कितने अंजान, अब तलक,
लगे पास, पर दूर कितने, वो फलक!

जी चाहे, छू लूं इन हाथों से,
उन रंगों को, उन पंखों को, उन अंगों को,
हटा दूं, बादलों के वो पर्दे,
तोड़ दूं, हदें,
जगती, कैसी ये ललक!

लगे पास, पर दूर कितने, वो फलक!

शायद, बस, दो कदम और,
चलता जाऊं अनथक, पाने को वो ठौर,
उसी, अनजाने की ओर,
उनकी, बातें,
अक्सर, इन होठों तक!

लगे पास, पर दूर कितने, वो फलक!

हलक में, बाकी प्यास यही,
बादलें ले आती, अक्सर, बरसात वही,
झांकता, गगन की ओर,
रोककर सांसें,
शायद, दे वो दस्तक!

लगे पास, पर दूर कितने, वो फलक!

कल हो, विहान इक ऐसा,
झाकें नैनों में फलक, मिट जाए ललक,
दामन में, सिमटे सपने,
प्रशस्त हो राहें,
ज़मीं से आसमां तक!

हो नजरों में, पर कितने अंजान, अब तलक,
लगे पास, पर दूर कितने, वो फलक!

Thursday, 1 January 2026

नववर्ष, कोटि-कोटि अभिनंदन!

2026, आपका अभिनंदन......

हूक भर रहा, मन में, हर आनेवाला क्षण,
उम्मीदों, आशाओं से, जागा यह मन,
अभिलाषाओं,  इच्छाओं से लबालब ये आंगन,
उत्कंठाओं का, नव-स्पंदन,
नववर्ष, तेरा कोटि-कोटि अभिनंदन!

2026, आपका अभिनंदन......

कल्पनाओं का, उफन रहा, इक सागर,
लहरों की धुन पर, झूमता ये गागर,
हर आहट, हर कंपन, अनगिनत से ये स्पंदन,
आह्लाद लिए प्रतीक्षित क्षण,
नववर्ष, तेरा कोटि-कोटि अभिनंदन!

2026, आपका अभिनंदन......

जागेंगे सोए प्राण, जागेंगे सोए अरमान,
सूरज संग, पूरब से जागेंगे विहान,
चूमेंगी किरणें, कलियों के चेहरे खिल आयेंगे,
भर जाएंगे सबके दामन,
नववर्ष, तेरा कोटि-कोटि अभिनंदन!

2026, आपका अभिनंदन......