Monday, 22 February 2016

चश्मा बदल के देखिए

चश्मा बदल के देखिए, है दुनियाँ अलग सी यहाँ,
हर शख्स निराला जगत में, हर शख्स अनोखा यहाँ,
कमी तुझको दिखेगी कहीं, शायद तुझ में ही यहाँ।

तू होगा ग्यानी बड़ा, गुरूर होगा खुदपर तुझको,
जग में भरे पड़े एक से एक नही मालूम तुझको,
चश्में की आड़ से निकलकर तू देख खुद को।

ग्यान, विद्या, धन, सम्मान, धीरज, सहनशीलता,
गुण हैं ये सभी उस विवेकशील शौम्य मानव के,
बदलते नही वो चश्मा तस्वीर नई देखने को।

"जीवन कलश" जीवन के कुछ लम्हे

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